सेबी का यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वित्तीय लचीलापन बढ़ाने और परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। माना जा रहा है कि इससे सड़क, परिवहन और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी।
पूंजीगत खर्च और क्षमता विस्तार के लिए मिलेगी मद
सेबी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अतिरिक्त उधारी का उपयोग पूंजीगत खर्चों के लिए किया जा सकेगा। इन खर्चों में परिसंपत्तियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना, क्षमता विस्तार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मजबूत करना शामिल है। नियामक ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव कार्यों पर होने वाले खर्चों को भी इस राहत के दायरे में शामिल किया है। ऐसे रखरखाव कार्य, जो सामान्य मरम्मत से अलग और कंसेशन एग्रीमेंट के तहत जरूरी होते हैं, अब अतिरिक्त कर्ज के जरिए पूरे किए जा सकेंगे।
सड़क परियोजनाओं को होगा सबसे ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सड़क क्षेत्र से जुड़े इनविट्स को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं में समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव की जरूरत होती है, जिसके लिए भारी फंडिंग की आवश्यकता पड़ती है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि बड़े रखरखाव खर्च में केवल वही कार्य शामिल होंगे, जो सामान्य संचालन और नियमित रखरखाव से अलग हों और अनुबंध के तहत अनिवार्य हों।
रीफाइनेंसिंग को भी मिली मंजूरी
सेबी ने इनविट्स, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) और होल्डिंग कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति भी दी है। हालांकि यह सुविधा केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित रहेगी। नियामक ने साफ किया कि जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य शुल्कों को रीफाइनेंसिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी केवल मूल कर्ज की राशि को ही नए कर्ज से बदला जा सकेगा।
तुरंत लागू हुए नए नियम
सेबी ने बताया कि यह संशोधित ढांचा 17 अप्रैल 2026 को इनविट नियमों में किए गए बदलावों के बाद लागू किया गया है और नए नियम तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई गति मिलेगी और इनविट्स को अपनी परिसंपत्तियों के विस्तार व रखरखाव में अधिक परिचालन स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
