सरकारी अधिकारियों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सीमित उपलब्धता या प्रतिबंध जैसी स्थिति देखने को मिली थी, लेकिन इसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन आपूर्ति प्रणाली मजबूत है और उपभोक्ताओं को नियमित रूप से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कुछ स्थानों पर अचानक ईंधन की मांग बढ़ने के कारण अस्थायी दबाव की स्थिति बनी, जिसके पीछे कई कारण सामने आए हैं। बताया गया है कि कृषि कार्यों के चलते डीजल की मांग में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुछ क्षेत्रों में खपत बढ़ गई। इसके अलावा निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतें अधिक रखने के कारण उपभोक्ताओं का रुझान सरकारी पेट्रोल पंपों की ओर बढ़ा है, जिससे वहां मांग अपेक्षाकृत अधिक हो गई।
इसके साथ ही कमर्शियल और संस्थागत ईंधन उपयोग से जुड़ी मांग का घरेलू उपभोक्ता बाजार की ओर स्थानांतरण भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तय होने वाली इन श्रेणियों में फिलहाल कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जिसके चलते उपभोक्ता सामान्य बाजार से ईंधन लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर कुछ क्षेत्रों में मांग का दबाव बढ़ाया है, लेकिन सप्लाई व्यवस्था पर इसका कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।
सरकारी स्तर पर यह भी बताया गया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कच्चे तेल की खरीद रणनीति में विविधता लाई जा रही है। विशेष रूप से रूस जैसे स्रोतों से आयात बढ़ाया गया है, जिससे आपूर्ति स्थिर बनी रहे। हाल के समय में कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में मदद कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बावजूद ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। एलपीजी की आपूर्ति भी सामान्य बनी हुई है और घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
कुल मिलाकर मौजूदा स्थिति में देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण में है, जबकि मांग में आए उतार-चढ़ाव के कारणों को भी समय पर नियंत्रित किया जा रहा है।
