मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव आमंत्रण रोकने के पीछे धन की कमी होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। टीडीबी ने भी अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट किया है कि मौजूदा प्रस्ताव आमंत्रण को केवल प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया गया है। बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के कारण निवेश समिति और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में जुटे हैं। संबंधित अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं, ताकि पात्र और योग्य परियोजनाओं का मूल्यांकन जल्द पूरा किया जा सके और उन्हें नियमानुसार मंजूरी दी जा सके। सरकार का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन आमंत्रण फिर शुरू किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) निकट भविष्य में अन्य सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) नियुक्त करने की प्रक्रिया में भी हैं। इससे आरडीआई योजना के क्रियान्वयन और वित्तपोषण क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। डीएसटी और एएनआरएफ आरडीआई योजना के डिजाइन, वित्तपोषण और निगरानी के लिए जिम्मेदार शीर्ष सरकारी संस्थान हैं। यह योजना 1 लाख करोड़ रुपये की है और इसके तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड एक फंड मैनेजर के रूप में कार्य करता है।
आरडीआई योजना का उद्देश्य उन कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और स्टार्टअप्स को सहायता देना है, जो डीप-टेक, अनुसंधान और नवाचार आधारित तकनीकों पर काम कर रहे हैं। विशेष रूप से रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं को इस योजना के तहत दीर्घकालिक और कम लागत वाली वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। योजना के तहत चयनित पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं को बड़े आकार के ऋण और अन्य वित्तीय सहायता दी जाती है। हालांकि, टीडीबी किसी परियोजना को धनराशि तभी जारी करता है, जब संबंधित संस्था गैर-सरकारी या निजी स्रोतों से निर्धारित अनुपात में पूंजी जुटाने में सफल हो जाती है।
मंत्रालय ने दोहराया कि आरडीआई योजना पूरी तरह सक्रिय है और इसके संचालन पर फंड की कमी का कोई असर नहीं पड़ा है। योजना का उद्देश्य भारत में अनुसंधान, नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव आमंत्रण को रोकने का कारण केवल बड़ी संख्या में प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया है। समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी और पात्र परियोजनाओं को नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती रहेगी।
