मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक नए सिस्टम की दिशा और उसकी तीव्रता ही तय करेगी कि इसका प्रदेश पर कितना असर पड़ेगा। 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं था, हालांकि सिस्टम की गतिविधियों के आधार पर मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। IMD के ताजा बुलेटिन में भी 19 से 23 सितंबर के दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियों तथा इसके बाद 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
भोपाल में दो बांधों के गेट खोले
इससे पहले शनिवार को भोपाल और आसपास के इलाकों में रातभर बारिश के बाद भदभदा डैम का एक और कलियासोत डैम के दो गेट खोलने पड़े। उधर ब्यावरा में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में उफान आ गया। अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा, जिससे आसपास के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
आगर जिले में भी कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की गई। नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के सामने से गुजर रहे नाले में पानी का बहाव इतना बढ़ गया कि एक कार बह गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। शहडोल में आकाशीय बिजली गिरने से 2 लोगों की जान चली गई।
45 जिलों में कहीं तेज, कहीं हल्की बारिश
शनिवार को मध्य प्रदेश के 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, पांढुर्णा, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।
विदिशा के लटेरी में सबसे ज्यादा 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। गुना के कुंभराज में 4 इंच और आगर-मालवा के नलखेड़ा में 92 मिमी यानी 3.7 इंच बारिश हुई। आगर के ही बड़ौद में 2.9 इंच, गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच और राजगढ़ के खिलचीपुर में ढाई इंच बारिश दर्ज की गई।
32 जिलों में अब भी 5 से 48% कम बारिश
पूरे मानसूनी सीजन की स्थिति देखें तो मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम रही है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज हुई है।
हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की बारिश की स्थिति बेहतर हुई थी, लेकिन शनिवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 2% हो गया।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के 23 जिलों में भी बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत इन जिलों में औसत से 5% से 48% तक कम पानी गिरा है।
इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
इसके उलट प्रदेश के 23 जिलों में मानसून सीजन के दौरान औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
मानसून अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और देश के कुछ हिस्सों से इसकी वापसी भी शुरू हो गई है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का दौर बना रहने और सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
