जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।
हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।
यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।
बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।
