17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को बाड़े में छोड़ा था। इसके साथ भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की औपचारिक शुरुआत हुई। परियोजना के पहले साल में ही कई चुनौतियां सामने आईं। 2022-23 के दौरान कुल नौ चीतों की मौत हुई। इनमें वयस्क चीते और शावक दोनों शामिल थे। गर्मी और डिहाइड्रेशन जैसी परिस्थितियों को कुछ मौतों से जोड़कर देखा गया। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के दौरान अफ्रीका से आए चीतों के लिए भारतीय मौसम के साथ तालमेल बनाना बड़ी चुनौती रहा।
पहले साल की मुश्किलों के बाद दूसरे साल तस्वीर में बदलाव दिखाई दिया। 2023-24 के दौरान चीतों के प्रजनन से उम्मीद बढ़ी। इस अवधि में जन्मे कई शावक जीवित रहे और 13 शावकों ने एक साल की उम्र पूरी की। इसी दौरान अफ्रीका से आए वयस्क चीतों के भारतीय परिस्थितियों के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
तीसरे साल परियोजना का फोकस केवल कूनो तक सीमित नहीं रहा। चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया और कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर राजस्थान के जंगलों तक पहुंचे। इसके बाद आसपास के इलाकों में उनकी निगरानी बढ़ाई गई। स्थानीय लोगों को चीतों के व्यवहार और उनसे जुड़ी सावधानियों की जानकारी देने के लिए चीता मित्रों को भी अभियान से जोड़ा गया। इसी क्रम में तीन चीतों को मंदसौर के गांधी सागर क्षेत्र में शिफ्ट किया गया।
अब परियोजना चौथे साल में नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। कूनो के बाद नौरादेही नेशनल पार्क को भी चीतों के लिए संभावित नए घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। वन विभाग के मुताबिक कूनो में मौजूद चीतों में बड़ी संख्या ऐसे जानवरों की है जिनका जन्म भारत में हुआ है। खुले जंगल में मौजूद चीते प्राकृतिक तरीके से शिकार कर रहे हैं और प्रजनन भी कर रहे हैं।
चीतों की निगरानी के लिए तकनीक और ग्राउंड टीम दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। कई चीतों के गले में सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं जिनसे उनकी लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है। इसके अलावा वन विभाग की टीमें लगातार जमीन पर निगरानी करती हैं। यदि कोई चीता कूनो की सीमा से बाहर निकलता है तो उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।
भारत में चीता पुनर्वास की कोशिश हालांकि नई नहीं है। 1970 के दशक में देश में चीते दोबारा बसाने की योजना पर विचार शुरू हुआ था। बाद में कई स्तरों पर प्रयास हुए लेकिन अलग अलग कारणों से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की अनुमति के रास्ते को आगे बढ़ाया। इसके बाद नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
कूनो की मौजूदा तस्वीर इस लंबे प्रयास के एक नए चरण को दिखाती है। शुरुआत में आठ चीतों से शुरू हुआ सफर अब 52 तक पहुंच चुका है। इनमें भारत में जन्मे चीतों की संख्या 32 है। आने वाले समय में चीतों को कूनो के अलावा दूसरे उपयुक्त क्षेत्रों में बसाने की योजना परियोजना के विस्तार का अहम हिस्सा होगी।
