परीक्षा के दौरान छात्रों ने इस संबंध में पर्यवेक्षकों से जानकारी लेने की कोशिश की। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। परीक्षा केंद्र पर स्थिति बिगड़ने के बाद छात्र एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
मामला यहीं नहीं रुका। नाराज छात्र एनएसयूआई के समर्थन के साथ कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के निवास पर पहुंच गए। वहां छात्रों ने धरना शुरू कर दिया और प्रश्नपत्र को लेकर जांच कराने की मांग रखी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में अगर निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग सवाल पूछे गए हैं तो इससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम पर असर पड़ सकता है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। विद्यार्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय पाठ्यक्रम का उचित तरीके से मिलान नहीं किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यार्थियों के हित में उचित कदम उठाने की मांग की।
एनएसयूआई आरडीवीवी प्रभारी अंचलनाथ ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यार्थी लंबे समय तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल आ जाएं तो छात्रों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि छात्र कई घंटे से कुलगुरु निवास के बाहर बैठे हैं और अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।
छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव और सिविल लाइन थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्रों की शिकायत को सुना और मामले की जानकारी ली। इस दौरान छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र की जांच कराने और परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों के हित में फैसला लेने की मांग दोहराई गई।
मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुनील दुबे ने बताया कि छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाने की जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और इसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल छात्रों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच जारी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र में वास्तव में निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल शामिल थे या नहीं। इसके बाद परीक्षा को लेकर आगे की प्रक्रिया और छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फैसला लिया जाएगा।
