नई दिल्ली । कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और मामले की आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल राहत देते हुए अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।
पूरा मामला सितंबर 2018 का है। उस समय राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-चीफ’ और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने भाषण का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था।
राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चोरी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी से पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से मानहानि मामले की कार्यवाही के साथ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द करने का अनुरोध किया था।
राहुल गांधी के वकीलों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष को लेकर थी। इसी आधार पर वकीलों ने दावा किया कि किसी पार्टी कार्यकर्ता को इस तरह की टिप्पणी के आधार पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।
इस दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शशि थरूर से संबंधित पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत और पहचान योग्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है तथा प्रधानमंत्री उसके प्रमुख प्रतिनिधि हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं की मानहानि होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ऐसा कोई गैर-कानूनी या अनुचित आधार नहीं है, जिसके चलते उसे रद्द किया जाए। इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।
हालांकि, फैसले के बावजूद राहुल गांधी को छह सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अगले छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित रहेगी और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से भी छूट मिलेगी। इस अवधि में वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
