विलफुल डिफॉल्टर उस व्यक्ति या कंपनी को कहा जाता है, जिसके पास कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त संपत्ति या संसाधन होने के बावजूद वह जानबूझकर कर्ज का भुगतान नहीं करता। इस मामले में बैंक की जांच के दौरान फंड के इस्तेमाल और उससे जुड़े लेनदेन को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 8 सितंबर 2026 को इस घटनाक्रम की जानकारी एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए दी। फाइलिंग के मुताबिक, केनरा बैंक की विलफुल डिफॉल्टर रिव्यू कमेटी ने 31 अगस्त 2026 को हुई बैठक में यह फैसला लिया। बैंक की जांच में पाया गया कि कंपनी ने बैंक से प्राप्त फंड का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिनके लिए कर्ज लिया गया था।
बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ग्रुप की कंपनियों आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड ने बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। जांच में इन कंपनियों से जुड़े निवेश और रकम के इस्तेमाल को लेकर विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है।
बैंक का आरोप है कि इन निवेशों को तुरंत भुनाया गया और संबंधित तथा गैर-संबंधित पक्षों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, नेटिजन नामक एक इकाई से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से फंड डायवर्ट किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर संबंधी कार्रवाई की है।
हालांकि, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी के मुताबिक आरकॉम और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड दोनों वर्तमान में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत हैं। कंपनी का कहना है कि केनरा बैंक से जुड़ा यह मामला दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले की अवधि का है।
कंपनी ने बताया कि लेनदारों की समिति पहले ही समाधान योजनाओं को मंजूरी दे चुकी है और ये योजनाएं अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं। कंपनी ने दिवाला और दिवालियापन संहिता की धारा 32A के तहत मिलने वाली सुरक्षा का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार, समाधान योजना को मंजूरी मिलने के बाद पिछले अपराधों के लिए कानूनी सुरक्षा का प्रावधान है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने यह भी कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम को लेकर कानूनी सलाह ले रही है। कंपनी के अनुसार, अनिल अंबानी 15 नवंबर 2019 से ही रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन और निदेशक पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
इस घटनाक्रम से अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कर्ज और दिवाला मामलों पर एक बार फिर ध्यान गया है। केनरा बैंक की कार्रवाई और कंपनी की ओर से दी गई कानूनी स्थिति के बीच अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
