वोडाफोन आइडिया के शेयर 15.40 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे थे। इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में शेयर में करीब 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। वहीं, 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में 32 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
HSBC की मुख्य चिंता वोडाफोन आइडिया की स्पेक्ट्रम से जुड़ी देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी जुटाने की क्षमता को लेकर है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि मोबाइल टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी से कंपनी की कमाई में सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ऑपरेटिंग कैश फ्लो स्पेक्ट्रम भुगतान की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
HSBC के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मोबाइल टैरिफ बढ़ने की संभावना है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2029 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो स्पेक्ट्रम भुगतान की आवश्यकताओं से कम रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि इन जरूरतों को पूरा करने के लिए वोडाफोन आइडिया को अगले तीन वर्षों में अपने ऑपरेटिंग कैश फ्लो को करीब तीन गुना करना होगा।
कंपनी के नेटवर्क में होने वाला निवेश उसके बाजार हिस्सेदारी को स्थिर रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, HSBC को उम्मीद नहीं है कि नेटवर्क पर निवेश से कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में कोई बड़ी बढ़ोतरी होगी। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच कंपनी के EBITDA में सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि हो सकती है।
इस अनुमान के पीछे मुख्य वजह मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी की संभावना बताई गई है। यानी टैरिफ बढ़ने से कंपनी की कमाई और EBITDA में सुधार की उम्मीद है, लेकिन इससे पैदा होने वाला अतिरिक्त कैश स्पेक्ट्रम भुगतान की जरूरतों को पूरी तरह संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
वोडाफोन आइडिया के लिए चुनौती केवल वित्त वर्ष 2029 के स्पेक्ट्रम भुगतान तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। HSBC ने कहा है कि वर्ष 2030 से शुरू होने वाले स्पेक्ट्रम रिन्यूअल के लिए भी कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। इससे आने वाले वर्षों में कंपनी के सामने फंडिंग की जरूरत बनी रह सकती है।
स्पेक्ट्रम भुगतान और भविष्य के रिन्यूअल के लिए पूंजी जुटाने की क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी को एक साथ नेटवर्क निवेश और अन्य परिचालन जरूरतों को भी पूरा करना है। HSBC की रिपोर्ट में इन्हीं वित्तीय जरूरतों को शेयर के लिए प्रमुख चुनौती के तौर पर देखा गया है।
वोडाफोन आइडिया के शेयर ने 2026 में अब तक मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन HSBC का आकलन कंपनी के भविष्य के कैश फ्लो और स्पेक्ट्रम देनदारियों पर केंद्रित है। ब्रोकरेज के मुताबिक, टैरिफ बढ़ोतरी से परिचालन प्रदर्शन में सुधार संभव है, लेकिन स्पेक्ट्रम से जुड़ी मौजूदा और भविष्य की भुगतान जरूरतों के लिए कंपनी को अपनी नकदी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करनी होगी।
