भोपाल। केबल एवं कनेक्टिविटी समाधान के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक कंपनी एलएपीपी ने मध्य प्रदेश की राजधानी
भोपाल स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र के विस्तारित परिसर का उद्घाटन किया। विस्तार के बाद भोपाल संयंत्र कंपनी के विश्वभर में संचालित सभी विनिर्माण संयंत्रों में सबसे बड़ा बन गया है। नई सुविधा में पावर लो-वोल्टेज केबल के निर्माण की व्यवस्था की गई है।
कंपनी के अनुसार, नई इकाई में तैयार होने वाली लो-वोल्टेज केबल का उपयोग कारखानों, व्यावसायिक भवनों, परिवहन प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, उपयोगिता परियोजनाओं सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इस सुविधा का निर्माण वर्ष 2025 में शुरू किया गया था और अब यह पूरी तरह परिचालन में आ गई है।
कंपनी ने यह विस्तार ऐसे समय में किया है, जब देश में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही पावर लो-वोल्टेज केबल की मांग में भी वृद्धि हो रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में वर्तमान और आगामी वित्त वर्ष के दौरान बुनियादी ढांचा क्षेत्र में करीब 24 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में प्रत्येक वर्ष लगभग 50 से 55 गीगावाट की वृद्धि होने की संभावना है।
भारत कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार
एलएपीपी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने कहा कि भोपाल में किया गया निवेश ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ‘भारत में भारत के लिए’ रणनीति के तहत देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले कनेक्टिविटी समाधान तैयार किए जा रहे हैं। भारत एलएपीपी के लिए एशिया का महत्वपूर्ण बाजार है, जबकि मध्य प्रदेश कंपनी के लिए एक अहम विनिर्माण केंद्र बन चुका है।
एलएपीपी ने वर्ष 2012 में भोपाल में अपना विनिर्माण संयंत्र शुरू किया था। शुरुआती दौर में यहां एकल-कोर केबल का उत्पादन किया जाता था। समय के साथ कंपनी ने संयंत्र में बहु-कोर केबल, सौर केबल, कंपाउंडिंग और ई-बीम तकनीक जैसी नई क्षमताएं जोड़ीं।
200 से अधिक लोगों को रोजगार
वर्तमान में भोपाल संयंत्र में 200 से अधिक लोग कार्यरत हैं। कंपनी के विश्वभर के संयंत्रों में सबसे बड़ा होने के साथ ही यह केंद्र कई आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां उन्नत पॉलिमर सामग्री का निर्माण भी कंपनी स्वयं करती है। इससे केबल की गुणवत्ता और प्रदर्शन पर बेहतर नियंत्रण संभव होता है।
ई-बीम तकनीक के उपयोग से केबल को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के साथ उनकी ताप सहने की क्षमता भी बढ़ाई जाती है। कंपनी के मुताबिक भोपाल संयंत्र का विस्तार एलएपीपी इंडिया के 30वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर हुआ है।
जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार
एलएपीपी के लिए जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी इसे प्रमुख विकास बाजार के रूप में देखती है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा है। समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने बचपन में अपने परिवार के साथ भारत की यात्राएं की थीं। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रियास लैप वर्ष 2000 से जर्मनी के दो राज्यों में भारत के मानद वाणिज्यदूत के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।
