बाजार में बुधवार को व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें 1.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत कमजोर हुआ। मीडिया, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज से जुड़े सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।
इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, सर्विसेज, फार्मा और कंजप्शन सूचकांकों में भी कमजोरी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में दबाव केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने बिकवाली की।
हालांकि आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ राहत दी। दोनों सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। कमजोर रुपये और कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग से आईटी कंपनियों को समर्थन मिलने की बात बाजार जानकारों ने कही।
लार्जकैप शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 130.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 63,408.75 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 101.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,707.15 अंक पर रहा।
सेंसेक्स में कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इंफोसिस और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल और इंडिगो में गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक भी कमजोर होकर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी का एक कारण रहा।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद स्थायी कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर बनी हुई है। ऊंचे क्रूड और बॉन्ड यील्ड का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।
बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। कमजोर रुपये से आईटी कंपनियों को संभावित लाभ की उम्मीद ने इस क्षेत्र के कुछ शेयरों को समर्थन दिया। हालांकि वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी फेड मिनट्स को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।
