पीयूष गोयल ने ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जोनाथन ग्रे और अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी कारोबार के चेयरमैन प्रकाश मेलवानी के साथ बैठक की। इसमें भारत में निवेश और साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में भारत में कारोबार के लिए मौजूद अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने न्यूबर्गर बरमन के चेयरमैन एवं सीईओ जॉर्ज वॉकर और उनकी नेतृत्व टीम से भी मुलाकात की। इस दौरान वित्तीय सेवाओं और वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में निवेश सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर बातचीत हुई। भारत में इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी अवसरों और भविष्य की साझेदारी की संभावनाओं को चर्चा में शामिल किया गया।
एस्टी लॉडर कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टेफान डी फावेरी के साथ हुई बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार पर चर्चा की गई। इस दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों और स्थानीय सोर्सिंग को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। बैठक में भारतीय बाजार की जरूरतों और कंपनी की संभावित भागीदारी से जुड़े विषयों पर बातचीत की गई।
आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बैठक में भारत में कंपनी की भागीदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया। तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर भी चर्चा का हिस्सा रहे।
पीयूष गोयल ने मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ से भी मुलाकात की। बैठक में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा कंपनी के संभावित विस्तार पर चर्चा हुई। इसके अलावा जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
एआईए ग्रुप के गैर-कार्यकारी चेयरमैन मार्क टकर के साथ हुई बातचीत में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के अवसरों पर चर्चा की गई। इस दौरान वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को भी रेखांकित किया गया। बैठक में इस क्षेत्र में निवेश और कारोबारी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार हुआ।
इन बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निवेश से जुड़े अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। भारत में अमेरिकी कंपनियों की कारोबारी भागीदारी बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
