बैठक में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हया भी शामिल रहे। अमेरिका की ओर से कुशनर ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी योजना का समर्थन नहीं किया जाएगा, जिसमें गाजा के लोगों को उनकी जमीन से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जाए। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित व्यवस्था में गाजा की आबादी को वहीं रखते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक में युद्ध के बाद गाजा के प्रशासन को लेकर भी चर्चा हुई। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत एक नई राष्ट्रीय समिति को क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही हमास को शासन व्यवस्था से अलग रखने और उसके हथियार तथा सैन्य ढांचा समाप्त करने की मांग सामने रखी गई है। यह मुद्दा बातचीत की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील शर्तों में शामिल है।
मिस्र में हुई वार्ता में केवल अमेरिका और हमास ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मिस्र, कतर और तुर्की के अधिकारियों ने बातचीत में हिस्सा लिया। मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशद, कतर के राजनयिक अली अल-थवादी और तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता में भाग लिया। बोर्ड ऑफ पीस के दूत निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी कुशनर के साथ मौजूद रहे।
कुशनर की मिस्र और इजराइल यात्रा ऐसे समय हुई है, जब गाजा को लेकर अमेरिकी प्रस्ताव पर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही प्रस्तावित योजना को इजराइल के लिए स्वीकार्य नहीं बता चुके हैं। ऐसे में हमास और क्षेत्रीय पक्षों के साथ कुशनर की बातचीत को कूटनीतिक सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
वार्ता के बाद हमास ने ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी जताई। संगठन ने मध्यस्थ देशों और बोर्ड ऑफ पीस से इजराइल पर समझौते की शर्तें लागू कराने के लिए दबाव बनाने की अपील की। हमास ने युद्धविराम के उल्लंघन रोकने, इजराइली सैन्य कार्रवाई बंद करने और दूसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग भी रखी।
गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण युद्धविराम की किसी भी पहल के सामने कई जटिल चुनौतियां बनी हुई हैं। एक तरफ हमास के हथियार और भविष्य की राजनीतिक भूमिका का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और गाजा के प्रशासन का स्वरूप महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की की भागीदारी से बातचीत को क्षेत्रीय समर्थन देने की कोशिश हो रही है।
अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष युद्धविराम की शर्तों, गाजा के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सहमति बना पाते हैं। कुशनर की यह पहल ट्रंप प्रशासन के लिए गाजा संघर्ष को राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाने की एक अहम कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है।
