संजय राउत ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार पहला मामला राम मंदिर के चंदे से जुड़ा है, जबकि दूसरा छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन और हिंसा के इस्तेमाल के निर्देश से संबंधित है। राउत का कहना है कि इन दोनों विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
राउत ने गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बयान से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और सवालों का सामना सदन में किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य को लेकर दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शाह को इस्तीफा देना होगा। हालांकि, यह राउत का राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार या गृह मंत्री की ओर से संबंधित प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही उनकी मांग स्पष्ट रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष केवल एक स्पष्ट बयान चाहता है। उनका सवाल है कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गोली और हिंसा का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, तो फिर उनके मंत्रालय में यह आदेश किसने दिया।
महुआ मोइत्रा ने राम मंदिर के चंदे से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं कर रही है। उनका तर्क था कि विपक्ष गृह मंत्री को सदन में आने से नहीं रोक रहा, बल्कि वह खुद सदन में आकर जवाब देने की मांग कर रहा है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गृह मंत्री के सदन में आने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और स्पष्टीकरण संसद के भीतर होना जरूरी है।
मॉनसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विपक्ष जहां गृह मंत्री के जवाब को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं इन मांगों के कारण सदन की कार्यवाही भी राजनीतिक तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों और विपक्ष की मांगों पर सदन में किस तरह प्रतिक्रिया देती है।
