जांच समिति ने मामले से संबंधित कार्यवाही का रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य सक्षम प्राधिकारी को भी सौंप दिए हैं। अब समिति की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच का औपचारिक चरण पूरा हो गया है।
पहले आरोप के तहत नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले की जांच की गई। समिति के अनुसार, वहां 500 रुपये के नोटों के रूप में रखी गई नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।
समिति ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अघोषित नकदी से संबंधित आरोप को सिद्ध माना। जांच में नकदी के संबंध में स्पष्ट और संतोषजनक जवाब का अभाव महत्वपूर्ण आधारों में शामिल रहा। इस निष्कर्ष के साथ समिति ने पहले आरोप को अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रमाणित माना है।
दूसरा आरोप मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण में कथित लापरवाही से संबंधित था। समिति ने पाया कि संबंधित स्टोररूम की स्थिति को कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले बदले जाने की बात सामने आई। इसके अलावा बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने को लेकर भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिल सका।
समिति ने इस स्थिति को साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता के रूप में देखा। हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही का यह मतलब नहीं है कि जज ने स्वयं किसी नोट को हटाया था। आरोप का आधार साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित रखने में हुई विफलता से जुड़ा रहा।
तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और जांच के दौरान उनके रुख से संबंधित था। समिति ने विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जवाब में अपेक्षित स्पष्टता का अभाव था और उनका रुख टालमटोल वाला पाया गया।
समिति ने स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस आरोप को भी सिद्ध माना। उसके अनुसार, मामले में जज से संस्थागत जिम्मेदारी के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक जवाब की अपेक्षा थी, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण उस कसौटी पर खरा नहीं उतरा।
तीनों आरोपों के सिद्ध पाए जाने के बाद समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट संबंधित प्रक्रिया के लिए सक्षम प्राधिकारी को सौंप दी है। अब रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी तथा संस्थागत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अंतिम कदम संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होंगे।
