आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी, तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच को मंजूरी जैसे कदम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
विधानसभा घेराव में पुलिस से भिड़े छात्र
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
घटना के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। तनाव के चलते विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की देर शाम तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम को पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के साथ मारपीट भी हुई। पासवान के मुताबिक, आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है।
सीएम सोरेन ने की शांति की अपील
घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सोरेन ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया और छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।
लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का आज बंद
10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजेपी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। पार्टी ने प्रदेश के लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है।
राहुल गांधी ने भी उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा
छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनके बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, जबकि सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में उनका रुख अलग होता है।
कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस भागीदार है, लेकिन JPSC-JSSC मामले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताया।
अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग की। उनका तर्क है कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं और JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है। ऐसे में CID की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
सरकार तीन परीक्षाएं कर चुकी है रद्द
सरकार JPSC-JSSC विवाद के बीच तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला पहले ही ले चुकी है। इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, छात्र संगठन अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।
पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार
विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह कार्रवाई JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई। इसी मामले में CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की थी।
22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना उचित है। खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को काम देने का आरोप है। प्रदर्शनकारी छात्र TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था।
मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे चेयरमैन
एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। उन पर झारखंड में कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TDPL को देने का आरोप है। TDPL को JSSC ने कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने आरोप लगाया था कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप हैं और झारखंड CID की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अभय तिवारी के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी नजर आए। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। CID के अनुसार, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था और बाद में गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है।
अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा कर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में उसके कथित रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया।
अब बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा आंदोलन?
JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र अभी भी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है, जबकि बीजेपी ने लाठीचार्ज के विरोध में बंद का ऐलान कर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मंगलवार के झारखंड बंद और सरकार-छात्र संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम आंदोलन को शांत कर पाते हैं या छात्रों का प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।
