कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए साध्वी ऋतंभरा, कथावाचक देवकीनंदन महाराज और महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज समेत 12 साधु-संतों को रेड कार्ड नोटिस जारी किया है।
आश्रम से बाहर नहीं निकलेगी कारसेवा
चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर समर्थन मांगा था।
स्वामी सच्चिदानंद ने पहले कहा था कि 9 अगस्त को कारसेवा की विधिवत घोषणा की जाएगी। शुरुआत में यह संभावना जताई जा रही थी कि कार्यक्रम के बाद कारसेवक आश्रम से बाहर निकलेंगे, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि रविवार को सभी कार्यक्रम आश्रम परिसर में ही होंगे। उन्होंने बताया कि साधु-संत आश्रम में ही आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे और कारसेवा की अगली दिशा को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
बंसीपहाड़पुर से पहुंची गुलाबी पत्थरों की पहली खेप
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से भरतपुर के बंसीपहाड़पुर से गुलाबी पत्थर मंगाए जा रहे हैं। करीब 50 हजार घन फीट पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से 350 घन फीट पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच चुकी है।
इन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में भी किया गया है। कारसेवा के शंखनाद के बाद इन पत्थरों पर नक्काशी का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए ओडिशा से 20 कारीगरों को बुलाया गया है। कारीगर पत्थरों पर ब्रज संस्कृति और राधा-कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े चित्र उकेरेंगे। उनके पहुंचते ही नक्काशी का काम शुरू होने की तैयारी है।
12 संतों को नोटिस, सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र
स्वामी सच्चिदानंद के मुताबिक कारसेवा के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन की ओर से उन्हें और अन्य संतों को रेड कार्ड नोटिस दिए जा रहे हैं। इनमें साध्वी ऋतंभरा, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज, श्रीचरणदास महाराज, सौरभ गौड़, सीतारामदास महाराज, संत अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण महाराज और महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज समेत 12 संत शामिल हैं।
नोटिस में पुलिस ने धार्मिक भावनाओं की आड़ में समाज को उत्तेजित करने और कारसेवा के नाम पर सोशल मीडिया पर वीडियो या पोस्टर साझा किए जाने का हवाला दिया है। प्रशासन ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान और आसपास ऐसी गतिविधियों से बचने को कहा है, जिनसे सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पत्थरों की दूसरी खेप फिलहाल रोकी गई
स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि गुलाबी पत्थरों की दूसरी खेप फिलहाल रोक दी गई है। रविवार के कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिला पूजन और कारसेवा के शंखनाद पर जोर रहेगा। इसके बाद आश्रम में मौजूद साधु-संत आपस में विचार-विमर्श करेंगे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए प्रस्तावित कारसेवा की आगे की दिशा तय करेंगे।
