नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।
कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
