नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री के मुखौटे पहनकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रही है और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
कांग्रेस विधायकों का कहना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं और उन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। साथ ही फसलों के उचित दाम, मुआवजे के भुगतान और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर भी किसानों में असंतोष है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह इन सभी मुद्दों को विधानसभा के भीतर मजबूती से उठाएगी और जरूरत पड़ने पर सदन के बाहर भी आंदोलन जारी रखेगी।
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की परेशानी के अलावा बेरोजगारी, युवाओं को रोजगार, अतिथि शिक्षकों की मांगें, पिछड़ा वर्ग से जुड़े विषय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष का कहना है कि राज्य के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ सदन में रखा जाएगा।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि केन-बेतवा परियोजना, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय और अन्य जनहित के मामलों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। विपक्ष का मानना है कि प्रदेश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिन पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विधायक दल ने सत्र के दौरान समन्वित रणनीति अपनाने का फैसला किया है।
वहीं, विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर किसानों, कृषि, रोजगार, शिक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और लंबित मुआवजे के मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर सदन के भीतर क्या जवाब देती है और किसानों से जुड़े मुद्दों पर कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।
