नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में बाल संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। जिले में पहली बार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम तथा दत्तक ग्रहण विनियम के तहत एक निराश्रित बच्ची का विधिक दत्तक ग्रहण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस प्रक्रिया के साथ न केवल एक बच्ची को नया परिवार मिला, बल्कि जिले की विशेषीकृत राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई ने भी अपने गठन के बाद पहली बड़ी सफलता हासिल की है। यह पहल बाल अधिकारों की सुरक्षा और निराश्रित बच्चों के पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
जिला प्रशासन की देखरेख में पूरी हुई इस प्रक्रिया को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देशन और जिला प्रोबेशन अधिकारी के पर्यवेक्षण में अंतिम रूप दिया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित औपचारिक प्रक्रिया के दौरान भावी दत्तक माता-पिता के सभी आवश्यक दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया गया। कानूनी औपचारिकताओं और आवश्यक पूछताछ के बाद जिलाधिकारी ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए बच्ची को दंपति की अभिरक्षा में सौंप दिया। पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय अधिनियम और दत्तक ग्रहण से संबंधित सभी निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न की गई।
जानकारी के अनुसार यह बच्ची लगभग पांच से छह महीने पहले जिले में अज्ञात अवस्था में मिली थी। उसके बाद उसे विशेषीकृत राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई के संरक्षण में रखा गया, जहां उसकी देखभाल, स्वास्थ्य और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बच्ची को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकृत कारिंग्स पोर्टल पर दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध कराया गया, ताकि पात्र परिवार नियमानुसार उसे गोद ले सकें।
इस बच्ची को जिस दंपति ने गोद लिया है, उन्होंने वर्ष 2022 में विधिक दत्तक ग्रहण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए वे पिछले चार वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पोर्टल के माध्यम से पात्रता के आधार पर उनका चयन किया गया और दस्तावेजों के सफल सत्यापन के बाद उन्हें बच्ची का विधिक संरक्षण प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया इस बात का उदाहरण है कि कानूनी व्यवस्था के माध्यम से निराश्रित बच्चों को सुरक्षित और स्थायी पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रशासन का मानना है कि इस सफलता से जिले में विधिक दत्तक ग्रहण व्यवस्था को नई पहचान मिलेगी और अधिक से अधिक योग्य परिवार कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इससे एक ओर निराश्रित बच्चों को सुरक्षित भविष्य मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पारदर्शी और व्यवस्थित दत्तक ग्रहण प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषीकृत राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि दत्तक ग्रहण की सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी, कानूनी और निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न कराई गईं। यह उपलब्धि चित्रकूट जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भविष्य में बाल संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।
