मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में करीब 15 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय एवं त्वरित न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने मामले के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि “न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान होती है।” यह मामला वर्ष 2011 में बाइक और नकदी लूट का विरोध करने पर किसान राज सिंह की गोली मारकर हत्या किए जाने से जुड़ा था।
लूट का विरोध पड़ा भारी
अभियोजन के अनुसार, भोपा थाना क्षेत्र के भोकरहेड़ी निवासी 48 वर्षीय किसान राज सिंह 20 अगस्त 2011 की रात करीब 8:15 बजे अपने साथी बिजेंद्र के साथ बाइक से शामली के कुड़ाना गांव स्थित अपनी बहन के घर जा रहे थे।
कुड़ाना से करीब एक किलोमीटर पहले आम के बाग के पास बदमाशों ने दोनों को घेर लिया। आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर उन्हें बाग में ले जाकर बंधक बना लिया। बिजेंद्र के हाथ-पैर बांध दिए गए, जबकि लूट का विरोध करने पर राज सिंह की बेरहमी से पिटाई की गई और बाद में उन्हें गोली मार दी गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
चारों आरोपियों को मिली मौत की सजा
मामले में कुड़ाना निवासी राहुल मलिक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस जांच के दौरान फुगाना के बहावड़ी गांव निवासी अजीत, सूरज उर्फ काला, शहर क्षेत्र के वहलना निवासी अनिल और देवरिया के घुसवा रामपुर निवासी सुनील के नाम सामने आए।
चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान पेश किए। सुनवाई के बीच अदालत में अनुपस्थित रहने पर 9 जुलाई को आरोपी सुनील के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था। सभी साक्ष्यों, गवाहों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर अदालत ने चारों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।
राहगीरों को बनाता था गिरोह निशाना
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कुड़ाना जाने वाले मुख्य मार्ग पर घात लगाकर खड़े रहते थे। वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों पर लाठियों से हमला कर उन्हें गिरा देते थे और फिर पास के बाग में ले जाकर बंधक बनाकर लूटपाट करते थे। जांच के अनुसार, किसान राज सिंह भी इसी गिरोह का शिकार बने थे।
