मध्य प्रदेश में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास आने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विभाग की कार्यप्रणाली, गौशालाओं की स्थिति, पशुपालकों की समस्याओं और बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल विभाग का प्रभार बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता अब व्यवस्था में वास्तविक सुधार और प्रभावी परिणाम देखना चाहती है।
अपने पत्र में पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले से कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग को भी अपने पास रखने के फैसले के बाद प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और गौ-सेवा से जुड़े लोगों की अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विभाग में सुधार के लिए कौन-से नए कदम उठाए जाएंगे और किस प्रकार समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर चारे, पानी, उपचार और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन बढ़ती लागत, महंगे चारे और सीमित सरकारी सहायता के कारण यह क्षेत्र आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।
पत्र में बेसहारा गोवंश से जुड़ी समस्या का भी उल्लेख किया गया है। पटवारी ने कहा कि सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में बेसहारा गोवंश से जुड़े 237 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 94 लोगों की मृत्यु हुई और 133 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखने वाले तथ्य हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि एक गौशाला में एक गोवंश के पालन-पोषण पर प्रतिदिन लगभग 70 रुपये का खर्च आता है, जबकि उपलब्ध अनुदान इससे काफी कम है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन और गोवंश की समुचित देखभाल दोनों प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होगी तो इस व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना कठिन होगा।
मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में पटवारी ने आग्रह किया कि यदि सरकार ने वास्तव में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी गंभीरता से स्वीकार की है तो प्रदेश की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए राहत पैकेज घोषित किया जाए, छुट्टा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए तथा किसानों की फसलों और सड़क दुर्घटनाओं में हुए नुकसान के लिए प्रभावी मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन की प्राथमिकता केवल विभागों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जनता को मिलने वाले परिणाम होने चाहिए। उनके अनुसार प्रदेश के किसान, पशुपालक और गौ-सेवा से जुड़े लोग अब ठोस फैसलों और जमीन पर दिखाई देने वाले बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद पशुपालन विभाग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्ष सरकार से जवाबदेही और स्पष्ट कार्ययोजना की मांग कर रहा है, जबकि अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग का प्रभार संभालने के बाद सरकार पशुपालन, गौशालाओं और बेसहारा गोवंश से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
