बबीना विधायक के वास्ते केसरिया दुपट्टा
झांसी। चंदवारी गांव की धूलभरी दोपहरी में जब सामूहिक विवाह का मंडप सजा, तो सबसे पीछे खड़े महेश कश्यप की आंखें भीग गईं। बबीना से सपा के ये ओजस्वी नेता, जो बरसों हर महीने मोटरसाइकिल पर वैष्णो देवी माता का आशीर्वाद लेने जाते थे, आज कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद मांग रहे थे।

केसरिया दुपट्टा डाले महेश कश्यप ने जब एक बेटी के सिर पर हाथ रखा, तो लगा जैसे पिता का साया मिल गया हो। वो बेटियां जिनके घर में छत तक नहीं थी, आज लाल जोड़े में लक्ष्मी सी लग रही थीं। लोग कहते हैं कश्यप जी खुद अमीर नहीं, पर दिल से राजा हैं। अपनी जेब से जो बन पड़ा, हर कन्या को शगुन दिया। देते वक्त नजरें झुका लीं, कि कहीं बेटी शरमा न जाए।
एक बुजुर्ग मां ने जब कहा “बेटा, तुमने हमारी इज्जत रख ली”, तो महेश कश्यप फूट-फूट कर रो पड़े। बोले, “मां, ये बेटियां मेरी अपनी हैं। इनका कन्यादान नहीं, मैं अपना फर्ज निभा रहा हूं।” वैष्णो देवी की वो लंबी यात्राएं शायद इसी दिन के लिए थीं। माता ने उनके हाथों से जोड़ों का घर बसवाया।
मंडप में बैठी हर दुल्हन के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो किसी दहेज से नहीं, महेश कश्यप जैसे लोगों की इंसानियत से आई थी। चंदवारी की मिट्टी गवाह है – राजनीति से परे भी कुछ रिश्ते होते हैं। बेटियों के आंसू पोंछने वाले हाथ, किसी पद से बड़े होते हैं।
आज चिरगांव ब्लॉक ने देखा कि नेता वो नहीं जो मंच से बोलता है, नेता वो है जो मंडप में बैठी बेबस बेटी का सहारा बन जाता है। महेश कश्यप ने कोई भाषण नहीं दिया। बस हर जोड़े को नमन किया और चुपचाप निकल गए, ताकि बेटियों की खुशी में खलल न पड़े। ये तस्वीरें वोट नहीं मांगतीं, ये तस्वीरें दिल मांगती हैं। और जिसने भी देखा, उसकी आंख भर आई।
