मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े किसी भी प्रकार के विवाद या आरोपों को लेकर लोगों को संयम रखना चाहिए और किसी भी तरह के बहकावे में आने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच के लिए सभी पक्षों को यदि कोई दस्तावेज या प्रमाण उपलब्ध हों तो वे जांच एजेंसी को सौंपें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर स्थापित हो रहा है और इस प्रक्रिया को लेकर धैर्य और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कुछ और समय प्रतीक्षा करें और जांच पूरी होने दें, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने कभी राम भक्तों और कारसेवकों पर गोली चलवाई, जय श्रीराम के नारे पर आपत्ति जताई और राम जन्मभूमि के अस्तित्व पर सवाल खड़े किए, वही आज उपदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अयोध्या के विकास और उसकी पहचान को कमजोर करने का प्रयास करते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या को बदनाम करने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं, लेकिन अब प्रदेश सरकार विकास और पारदर्शिता के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच पूरी होने तक अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए क्योंकि इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
योगी आदित्यनाथ ने दोहराया कि सरकार किसी भी अपराधी को बख्शने के पक्ष में नहीं है और कानून अपना काम पूरी सख्ती के साथ करेगा। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
