रविवार के दिन पूजा की शुरुआत प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद साफ और संभव हो तो लाल या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई कर सूर्य देव का स्मरण करें।
सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली तथा थोड़ा गुड़ डाल लें। फिर पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
अर्घ्य के दौरान निम्न मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है—
“ॐ घृणि: सूर्याय नमः”
या
“ॐ सूर्याय नमः”
मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव के समक्ष दीपक जलाएं और लाल चंदन, लाल पुष्प तथा गुड़ का भोग अर्पित करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य चालीसा या सूर्य कवच का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति को करियर, शिक्षा तथा सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़, तांबे के पात्र, लाल वस्त्र या लाल फल दान करना भी शुभ माना गया है। यह उपाय सूर्य दोष को कम करने और सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है या जिन्हें आत्मविश्वास की कमी, सरकारी कार्यों में बाधा, मान-सम्मान में कमी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए रविवार का व्रत और सूर्य पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है।
पूजा के दौरान मन में सकारात्मक भाव रखें और सूर्य देव से परिवार के सुख, स्वास्थ्य और उन्नति की कामना करें। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
