पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब एडवोकेट अपने मकान निर्माण के लिए थोक में सीमेंट खरीदने के लिए इंटरनेट पर “अल्ट्राटेक सीमेंट डीलर” सर्च कर रहे थे। इसी दौरान उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया और लोकल डीलर से संपर्क कराने की बात कही।
कुछ ही देर बाद एक अन्य नंबर से कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को आशीष शुक्ला बताते हुए अल्ट्राटेक का अधिकृत डीलर होने का दावा किया। आरोपी ने 840 बोरी सीमेंट 230 रुपये प्रति बोरी की सस्ती दर पर देने का सौदा तय किया, जिससे पीड़ित का भरोसा मजबूत हो गया।
ठगों ने पूरी योजना के तहत वॉट्सऐप पर जीएसटी सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, कैंसिल चेक और डिलीवरी एड्रेस जैसे कई दस्तावेज भेजकर खुद को असली डीलर साबित करने की कोशिश की। इसके बाद 1,93,200 रुपये का फर्जी इनवॉइस बिल भी भेजा गया।
इन दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए एडवोकेट ने अपनी पत्नी के बैंक खाते से पूरी रकम मुंबई के अंधेरी स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते में ट्रांसफर कर दी। लेकिन अगले ही दिन जब सीमेंट की डिलीवरी नहीं हुई और दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने असली अल्ट्राटेक कंपनी के अधिकृत डीलर से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि उनके पास भेजा गया बिल और डील पूरी तरह फर्जी है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई और मुरार थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
पुलिस अब बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच के आधार पर साइबर ठगों की तलाश में जुट गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठगों ने पूरी योजना बनाकर इंटरनेट सर्च का फायदा उठाते हुए यह फ्रॉड किया।
यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि ऑनलाइन सर्च से मिले अनजान नंबरों और डील्स पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।
