प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला कर्मचारी मंदिर परिसर में अपने कार्य में लगी हुई थी, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता वहां पहुंचा और उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद महिला दर्द से तड़पने लगी और आसपास मौजूद लोग उसकी मदद के लिए दौड़े। घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
महाकाल मंदिर ही नहीं, पूरे उज्जैन शहर में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर होती जा रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम और कई कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड लगातार लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक दोनों ही इन हमलों से परेशान हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच उज्जैन में 2439 लोगों को कुत्तों ने काटा है। इसके अलावा 192 लोग बिल्ली, बंदर और घोड़े के हमलों में घायल हुए हैं। यह स्थिति शहर में पशु नियंत्रण व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाती है।
मंदिर परिसर में पिछले दो वर्षों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में दिल्ली से आई एक महिला श्रद्धालु भी कुत्तों के हमले में घायल हुई थी, जिसे तुरंत मंदिर अस्पताल में उपचार दिया गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्ते लगातार घूमते रहते हैं और कई बार श्रद्धालुओं पर हमला कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल प्रशासन और नगर निकाय पर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद स्थायी नियंत्रण व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।
