नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में अब जांच एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। लंबे समय से चल रही पड़ताल के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जिसे इस पूरे हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद शुरुआती जांच प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि मामले में पहले एक निर्दोष व्यक्ति को गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था।
जांच के शुरुआती दौर में पुलिस ने बिहार और उत्तर प्रदेश से तीन लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें मयंक मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह नाम के व्यक्ति शामिल थे। पुलिस का दावा था कि ये लोग हत्या की साजिश और वारदात से जुड़े हुए हैं। हालांकि परिवार वालों ने शुरुआत से ही राज सिंह की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि घटना के समय वह अयोध्या में मौजूद था और उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके उसे कई दिनों तक हिरासत में रखा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। इसके बाद जब पूरे नेटवर्क और घटनाक्रम की दोबारा जांच की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एजेंसी ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्धों के आपसी संपर्कों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पहले गिरफ्तार किया गया व्यक्ति गलत पहचान का शिकार हुआ था और वास्तविक साजिशकर्ता कोई दूसरा व्यक्ति है।
इसके बाद जांच टीम ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में छापेमारी कर राजकुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार वही इस पूरे हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता है और लंबे समय से वारदात की योजना तैयार कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और अन्य जुड़े लोगों की जानकारी हासिल की जा सके।
इसी बीच जांच एजेंसी ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस हत्याकांड का नेटवर्क अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है और आने वाले दिनों में कुछ और नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तारी और निर्दोष व्यक्ति को कई दिनों तक हिरासत में रखने की घटना ने पुलिस कार्रवाई की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजर अब जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
फिलहाल जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या के पीछे आखिर असली मकसद क्या था और इस साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड से जुड़े नए खुलासे सामने आने की संभावना भी बढ़ती जा रही है।
