समिति के सदस्य रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों को नि:शुल्क शीतल पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही समिति के कार्यकर्ता सक्रिय हो जाते हैं और यात्रियों की खाली बोतलों में ठंडा पानी भरते हैं। कई सदस्य सीधे यात्रियों को पानी पिलाते भी नजर आते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में यह सेवा यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
समिति के सदस्यों के अनुसार, इस सेवा कार्य की शुरुआत एक व्यक्तिगत अनुभव से हुई थी। कुछ वर्ष पहले समिति के सदस्य लोकल ट्रेन से गिरिराज धरण यात्रा पर गए थे। यात्रा के दौरान उन्हें कई रेलवे स्टेशनों पर पीने का पानी नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें प्रेरित किया कि गर्मी के मौसम में रेलवे स्टेशन पर जरूरतमंद यात्रियों के लिए जलसेवा शुरू की जाए।
शुरुआत में यह पहल केवल चार लोगों ने मिलकर शुरू की थी, लेकिन समय के साथ इसमें लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया। आज समिति में 30 से अधिक सदस्य शामिल हैं। इनमें शासकीय कर्मचारी, व्यापारी और शहर के प्रतिष्ठित परिवारों के लोग भी शामिल हैं, जो स्वेच्छा से इस सेवा में योगदान दे रहे हैं।
समिति विशेष रूप से ट्रेन के जनरल कोच में सफर करने वाले यात्रियों को प्राथमिकता देती है। सदस्यों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर यात्री अक्सर पानी की बोतल खरीदने में सक्षम नहीं होते, इसलिए उनकी जरूरत को ध्यान में रखते हुए उन्हें पहले पानी उपलब्ध कराया जाता है।
रेलवे स्टेशन पर यह दृश्य लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री और ट्रेन में सफर कर रहे लोग समिति के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं। कई यात्रियों ने कहा कि इस भीषण गर्मी में ठंडा पानी मिलना किसी राहत से कम नहीं है।
भीषण गर्मी के बीच जहां लोग अपने घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं गिरिराज धरण समिति के सदस्य रोजाना रेलवे स्टेशन पहुंचकर सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उनका यह प्रयास न केवल सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी लोगों को बड़ी राहत दे सकते हैं।
मानवता और सेवा भाव से प्रेरित यह जलसेवा अब शाजापुर में लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है और गर्मी के इस कठिन दौर में यात्रियों को राहत पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी।
