संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी इस सुधार की खुलकर वकालत करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं अब बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुसार प्रभावी नहीं रह गई हैं। उन्होंने साफ कहा कि UNSC में बदलाव “अनिवार्य” है, क्योंकि यह संस्था अब पुरानी हो चुकी शक्ति संरचना पर आधारित है।
G4 का नया प्रस्ताव: वीटो पर अस्थायी रोक का सुझाव
G4 Nations ने इस बार एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। इसके अनुसार, नए स्थायी सदस्यों को पहले 15 वर्षों तक वीटो पावर नहीं दी जाएगी। इस दौरान वे केवल जिम्मेदारी निभाएंगे लेकिन वीटो अधिकार सीमित रहेगा।
भारत के प्रतिनिधि हारिश परवाथनेनी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। उनका कहना है कि मौजूदा ढांचा वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।
सबसे बड़ा विवाद: वीटो पावर और स्थायी सदस्यता
UNSC में अभी 5 स्थायी सदस्य हैं—
United States, United Kingdom, France, Russia और China।
इन सभी के पास वीटो पावर है, जो किसी भी बड़े वैश्विक निर्णय को रोक सकती है। यही कारण है कि सुधार प्रक्रिया दशकों से अटकी हुई है।
भारत की राह में सबसे बड़ी रुकावट कौन?
भारत और G4 के प्रस्तावों का सबसे मजबूत विरोध चीन कर रहा है। चीन का कहना है कि एशिया में पहले से ही उसका प्रतिनिधित्व है और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने से शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा।साथ ही Pakistan Government भी भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर विरोध कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ेगा।
विश्लेषकों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान का संयुक्त विरोध ही भारत की UNSC स्थायी सीट की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
वैश्विक राजनीति में भारत की चुनौती
भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद अब तक UNSC में स्थायी सदस्य नहीं बन पाया है। G4 देशों का मानना है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब पुराने ढांचे से मेल नहीं खाता।
हालांकि, यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश सुधार के पक्ष में हैं, लेकिन सहमति की कमी के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
UNSC सुधार अब केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है। G4 देशों का दबाव और महासचिव का समर्थन भारत के लिए उम्मीद जरूर बढ़ाता है, लेकिन चीन-पाकिस्तान का विरोध इस राह में सबसे बड़ी दीवार बना हुआ है।
