पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री को मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किया, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाते हैं। मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी से आने वाला एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित प्राकृतिक रेशम है, जिसे इसकी सुनहरी चमक और मजबूती के लिए जाना जाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है और समय के साथ इसकी चमक और भी निखरती जाती है, जो इसे अत्यंत खास बनाता है।
वहीं शिरुई लिली सिल्क स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी वादियों से प्रेरित है। इस क्षेत्र में पाया जाने वाला शिरुई लिली फूल अपनी दुर्लभता और अद्वितीय सुंदरता के लिए जाना जाता है। हल्के गुलाबी और सफेद रंग की पंखुड़ियों वाला यह फूल स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इस स्टोल में न केवल इस फूल की सुंदरता को दर्शाया गया है, बल्कि वहां की लोककथाओं और सांस्कृतिक भावनाओं को भी बारीकी से उकेरा गया है।
भारत द्वारा दिए गए इन उपहारों का एक खास पहलू यह भी है कि इनमें भारत और इटली की सांस्कृतिक समानताओं की झलक भी दिखाई देती है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, जिससे दोनों देशों के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक जुड़ाव और समझ विकसित होती है। यह प्रतीकात्मक समानता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा बनाती है।
इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति को आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान कलाकारों की सीडी भी भेंट की। यह उपहार भारत की कला, संगीत और शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान बने हुए हैं।
आगरा की पच्चीकारी कला, जिसे मार्बल इनले वर्क भी कहा जाता है, विश्व प्रसिद्ध है और इसका ऐतिहासिक संबंध भी भारत और इटली की कला परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह कला दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये सांस्कृतिक उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कौशल और परंपराओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली माध्यम बने हैं, जिससे भारत-इटली संबंधों को एक नई सांस्कृतिक गहराई मिली है।
