नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।
अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।
अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।
केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।
उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।
अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।
