हालांकि बाजार में बढ़ती रौनक के बीच खरीदारों की चिंता भी साफ दिखाई दी, क्योंकि इस बार बकरों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो बकरा पिछले वर्ष 10 से 15 हजार रुपए में आसानी से मिल जाता था, उसकी कीमत अब 20 से 30 हजार रुपए तक पहुंच गई है। वहीं अच्छी नस्ल और अधिक वजन वाले बकरों के दाम कई गुना बढ़कर आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
बाजार में इस बार अलवरी, तोतापरी, सिरोही और अजमेरा नस्ल के बकरे बिक्री के लिए लाए गए हैं। इनकी कीमत 15 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक बताई जा रही है। व्यापारियों के अनुसार बकरों की कीमत उनके वजन, नस्ल और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है, जिसके चलते अच्छी क्वालिटी वाले पशुओं की मांग काफी बढ़ गई है।
पलसूद, सेंधवा और बड़वानी के पशु बाजारों में त्योहार नजदीक आने के साथ खरीदारी तेज हो गई है। स्थानीय व्यापारियों के अलावा महाराष्ट्र सहित आसपास के राज्यों से भी खरीदार यहां पहुंच रहे हैं। बाजार में बड़े और भारी भरकम बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जहां हर कोई अपनी जरूरत और बजट के अनुसार पशु खरीदने की कोशिश कर रहा है।
खरीदारों का कहना है कि इस बार दाम पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे आम लोगों के बजट पर असर पड़ा है। इसके बावजूद बकरीद को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है और लोग अपनी क्षमता के अनुसार पशुओं की खरीदारी में जुटे हैं।
