सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी कोई योजना न तो प्रस्तावित है और न ही इस दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है, जिसमें मंदिरों या धार्मिक ट्रस्टों के स्वामित्व वाले सोने को मोनेटाइज करने की बात शामिल हो। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहें गलत जानकारी पर आधारित हैं और इनसे जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है।
वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा है कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का उद्देश्य व्यक्तिगत या संस्थागत सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाना होता है, लेकिन इसे किसी भी धार्मिक संस्था के संपत्ति अधिकारों से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत है। सरकार ने यह साफ किया है कि धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाता है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और न ही उन्हें आगे साझा करें। सरकार का कहना है कि गलत जानकारी के प्रसार से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी गलत संदेश जाता है। इसलिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि हाल के दिनों में आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं, जिनमें सोने और अन्य कीमती धातुओं से जुड़ी नीतियों को लेकर गलत दावे शामिल हैं। ऐसे में सरकार ने समय रहते स्पष्टिकरण जारी कर स्थिति को साफ करने का प्रयास किया है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी न फैले।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में सूचना तेजी से फैलती है, लेकिन कई बार बिना पुष्टि के दावे भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए जरूरी हो जाता है कि वे समय पर सही जानकारी साझा करें ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल वित्त मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मंदिरों के सोने को लेकर किसी भी प्रकार की मोनेटाइजेशन योजना सरकार की ओर से नहीं लाई जा रही है और यह पूरा दावा निराधार है।
