सूत्रों के अनुसार सरकार IDBI Bank में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे पहले इस डील को रोक दिया गया था क्योंकि शुरुआती दौर में मिली बोलियां अपेक्षित मूल्य से कम थीं, जिससे सरकार संतुष्ट नहीं थी। अब अधिकारियों द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि प्रक्रिया को अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि नए और मजबूत निवेशक इसमें रुचि दिखाएं।
बताया जा रहा है कि सरकार इस बार बिक्री प्रक्रिया को सरल और निवेशकों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें बैंक के मूल्यांकन ढांचे में बदलाव और रिजर्व प्राइस को समायोजित करने जैसी संभावनाएं शामिल हैं, ताकि बोली लगाने वाले अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में भाग ले सकें। पहले चरण में मिली कमजोर प्रतिक्रिया के बाद यह माना जा रहा है कि नए सिरे से रणनीति बनाकर प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सकता है।
इस डील में IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री लंबे समय से सरकार की बड़ी आर्थिक योजनाओं का हिस्सा रही है। सरकार लगातार अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बैंक की बिक्री अब तक कई कारणों से पूरी नहीं हो पाई है। यदि यह सौदा सफल होता है तो यह हाल के वर्षों में बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री में से एक माना जाएगा।
पहले इस प्रक्रिया में कई बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समूह भी शामिल थे, लेकिन कीमत और शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है तो इसमें नए निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे समय और बढ़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरों का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर पड़ता है और निवेशकों की उम्मीदें तुरंत बदल जाती हैं। IDBI Bank के शेयर में आई तेजी भी इसी सकारात्मक धारणा का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा और निवेश शर्तों पर निर्भर करेगा।
