स्थानीय जानकारी के अनुसार, दुकानदार रात करीब 9 बजे अपनी दुकानें बंद कर घर चले गए थे। इसके कुछ घंटों बाद अचानक आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी दुकानों में रखा कबाड़ तेजी से जलने लगा।
आग की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने के लिए 10 दमकल गाड़ियों को लगाया गया, लेकिन संकरी गलियों और घनी आबादी के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दमकल वाहन घटनास्थल तक सीधे नहीं पहुंच पाए, जिसके चलते पानी की आपूर्ति में भी देरी हुई।
करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका, लेकिन तब तक दुकानों में रखा सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो चुका था। आग लगने से लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है, हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल फायर विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं।
सीएसपी एमएल नागोतिया ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दमकल विभाग की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया गया। आग लगने के कारणों की जांच जारी है।
इस घटना के बाद एक बार फिर शहर के बीच स्थित कबाड़ गोदामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इन गोदामों को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे पहले भी इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है, जिसमें बड़े हादसे की आशंका जताई गई थी।
यह हादसा न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत भी दर्शाता है।
