नई दिल्ली । प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने परियोजना के तहत अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के लिए किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की दरें भी तय कर दी हैं। इसके अनुसार शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट का दो गुना और ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक जिले में प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली अधिकतर भूमि ग्रामीण श्रेणी में आती है। ऐसे में यहां के किसानों को सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा मिलने की संभावना है। वहीं जिले में केवल औरंगाबाद कस्बा ही शहरी क्षेत्र की श्रेणी में आता है। इसलिए इस क्षेत्र में जमीन देने वाले किसानों को सर्किल रेट का दो गुना मुआवजा दिया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। किसानों को सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाएगा ताकि किसी को भी आर्थिक नुकसान न हो। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों से लगातार संवाद बनाए रखें और उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान करें। बताया जा रहा है कि इस लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा। प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क स्थापित होगा जिससे आवागमन आसान हो जाएगा।
इसके अलावा परियोजना से व्यापार और उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। प्रशासन का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद आसपास के क्षेत्रों का आर्थिक विकास तेजी से होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
भूमि अधिग्रहण से जुड़े सर्वे और अन्य प्रारंभिक औपचारिकताएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। अब मुआवजे की दरें तय होने के बाद प्रक्रिया को और तेज करने की तैयारी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी कर परियोजना के निर्माण कार्य को जल्द शुरू किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का विश्वास भी बना रहे।
