अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम्स (ICOM) द्वारा की गई थी। इसके बाद से हर साल एक विशेष थीम के साथ यह दिवस मनाया जाता है। दुनिया के हजारों संग्रहालय इस अवसर पर प्रदर्शनी, कार्यशाला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित करते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकें।
भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में संग्रहालयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। देशभर के संग्रहालय प्राचीन सभ्यताओं, स्वतंत्रता आंदोलन, कला, विज्ञान, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोकर रखे हुए हैं। दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय, भोपाल का जनजातीय संग्रहालय, कोलकाता का इंडियन म्यूजियम और मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय देश की विरासत को दर्शाने वाले प्रमुख केंद्र हैं।
संग्रहालय विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी ज्ञान का बड़ा स्रोत होते हैं। यहां रखी दुर्लभ पांडुलिपियां, मूर्तियां, चित्रकला, हथियार, सिक्के और ऐतिहासिक दस्तावेज अतीत को समझने में मदद करते हैं। आधुनिक दौर में डिजिटल तकनीक के माध्यम से कई संग्रहालय वर्चुअल टूर और ऑनलाइन प्रदर्शनी भी शुरू कर चुके हैं, जिससे लोग घर बैठे इतिहास और संस्कृति से जुड़ पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संग्रहालय समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। तेजी से बदलती दुनिया में जहां आधुनिकता का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं संग्रहालय हमारी परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर लोगों से अपील की जाती है कि वे संग्रहालयों का भ्रमण करें, बच्चों को इतिहास और संस्कृति से परिचित कराएं और अपनी धरोहरों के संरक्षण में योगदान दें। यह दिन हमें याद दिलाता है कि किसी भी देश की असली पहचान उसकी संस्कृति, इतिहास और विरासत में छिपी होती है।
