नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने अपने करियर के शुरुआती दिनों की एक ऐसी कहानी साझा की है, जो उनके संघर्ष, भावनाओं और परिवार के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है। यह किस्सा उस समय का है जब उन्होंने अपनी पहली बड़ी कमाई को अपने लिए नहीं बल्कि अपने पिता सलीम खान के लिए एक खास तोहफे पर खर्च करने का फैसला किया था। यह तोहफा एक बेहद कीमती रोलेक्स घड़ी थी, जिसकी कीमत उस समय लगभग 9 लाख रुपये थी।
सलमान खान ने बताया कि उस दौर में उनके पास इतनी बड़ी रकम मौजूद नहीं थी, लेकिन अपने पिता के लिए कुछ खास करने की इच्छा इतनी मजबूत थी कि उन्होंने बिना देर किए कर्ज लेने का फैसला कर लिया। उनके पास केवल चार लाख रुपये थे, जबकि बाकी पांच लाख रुपये उन्होंने उधार लेकर पूरे किए। यह निर्णय उनके लिए आर्थिक रूप से आसान नहीं था, लेकिन भावनात्मक रूप से यह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
जब सलमान ने वह घड़ी खरीदी और अपने पिता को भेंट की, तो उनका अनुभव बिल्कुल वैसा नहीं था जैसा उन्होंने सोचा था। सलीम खान ने खुशी जताने के बजाय बेटे के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सलमान को सख्त लहजे में समझाया कि अभी करियर की शुरुआत है और इतनी बड़ी रकम खर्च करना सही नहीं है। सलीम खान ने यहां तक कहा कि क्या वह खुद को कोई राजा-महाराजा समझते हैं जो बिना सोचे-समझे इतना खर्च कर रहे हैं।
यह प्रतिक्रिया सलमान के लिए उस समय थोड़ी निराशाजनक जरूर रही, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। समय के साथ यह घड़ी केवल एक महंगा तोहफा नहीं रही, बल्कि पिता और पुत्र के रिश्ते की एक यादगार निशानी बन गई। सलीम खान ने उस घड़ी को संभालकर रखा और बाद में जब सलमान ने दोबारा घड़ियां पहनना शुरू किया, तो वही घड़ी उन्होंने अपने बेटे को आशीर्वाद के रूप में वापस सौंप दी।
सलमान खान ने यह भी बताया कि उन्होंने लंबे समय तक, लगभग 26 से 28 सालों तक घड़ियां पहनना लगभग बंद कर दिया था। उनके अनुसार, जो भी घड़ियां वह कभी-कभार पहनते हैं, वे अक्सर उनके अपने नहीं होते बल्कि दोस्तों से ली हुई होती हैं, जिन्हें वह कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद लौटा देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास किसी बड़े घड़ी संग्रह की जो चर्चा होती है, वह पूरी तरह गलत है।
यह कहानी केवल एक महंगी घड़ी या कर्ज की नहीं है, बल्कि एक बेटे की अपने पिता के प्रति भावनाओं और जिम्मेदारी की भी झलक है। यह दिखाती है कि कभी-कभी इरादे पैसे से बड़े होते हैं, और रिश्तों की गहराई किसी भी कीमत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। सलमान खान का यह किस्सा उनके निजी जीवन के उस पहलू को सामने लाता है, जिसमें सफलता से पहले संघर्ष, भावनाएं और पारिवारिक मूल्य सबसे ऊपर रहे हैं।
