ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत विकसित किया गया है, अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। यदि यह INSTC नेटवर्क से जुड़ता है, तो रूस, मध्य एशिया, पाकिस्तान और चीन के बीच व्यापारिक पहुंच और मजबूत हो सकती है।
INSTC मूल रूप से भारत, रूस और ईरान की पहल है, जिसका उद्देश्य यूरोप और एशिया के बीच तेज और कम लागत वाला व्यापार मार्ग तैयार करना है। अब पाकिस्तान की संभावित एंट्री को क्षेत्रीय भू-राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और CPEC को अतिरिक्त रणनीतिक मजबूती मिल सकती है। वहीं भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ग्वादर पोर्ट पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की बढ़ती मौजूदगी का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि, अभी इस परियोजना पर अंतिम समझौते या औपचारिक शामिल किए जाने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रूस की सहमति को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है।
रूस ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को INSTC कॉरिडोर से जोड़ने पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे चीन-पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
इस घटनाक्रम को भारत के लिए क्षेत्रीय प्रभाव और व्यापारिक हितों के लिहाज से नई चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
