विधानसभा के भीतर हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने 144 मतों के साथ बहुमत साबित किया, जबकि सदन में उनकी पार्टी और सहयोगियों के पास कुल विधायकों की संख्या महज 120 थी। यह अतिरिक्त 24 वोटों का अंतर ही इस विवाद की मुख्य जड़ बना हुआ है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एआईएडीएमके के लगभग 25 विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसमें मन्नारगुडी के कद्दावर नेता कामराज का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर ऐन वक्त पर पाला बदलकर सत्ता पक्ष का साथ दिया। डीएमके ने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करार देते हुए सदन से वॉकआउट किया और इस जीत को अनैतिक बताया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विजय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता के जनादेश का अपमान बताया है। विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आम लोगों की सरकार है और यह बहुमत तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव की उस इच्छा को दर्शाता है जो जनता ने चुनाव के दौरान व्यक्त की थी। विजय का तर्क है कि उनकी पार्टी ने बेहद कम समय में जनता का बड़ा विश्वास हासिल किया है और 34.92 प्रतिशत वोट शेयर मिलना इस बात का प्रमाण है कि लोग अब पारंपरिक राजनीति से ऊब चुके हैं। उन्होंने सरकार को अल्पमत की सरकार कहने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि उनका प्रशासन समावेशी विकास और सभी समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे।
इस पूरे प्रकरण ने राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक सुचिता पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं और इसे बदलाव की लहर बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इस जीत के पीछे के ‘मैनेजमेंट’ को लेकर हमलावर है। विधायकों का इस तरह से क्रॉस वोटिंग करना आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में बड़े फेरबदल का संकेत दे रहा है। यदि इन आरोपों की गहराई से जांच होती है, तो यह न केवल सरकार की स्थिरता बल्कि मुख्यमंत्री विजय की उस ‘क्लीन इमेज’ के लिए भी बड़ी चुनौती होगी जिसे उन्होंने पिछले तीन सालों की कड़ी मेहनत से बनाया है। फिलहाल, चेन्नई की गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या यह नई सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी या फिर गठबंधन और तोड़-फोड़ की यह राजनीति किसी नए संकट को जन्म देगी।
