
रूपनारायण चतुर्वेदी
भोपाल
*मां, एक शब्द शहद की मिठास से भरा। मां, एक रिश्ता परिभाषाओं की परिधि से परे। मां, बेशुमार संघर्षों में अनायास खिल उठने वाली एक आत्मीय मुस्कान, एक शीतल एहसास। मां, न पहले किसी उपाधियों की मोहताज थीं, ना आज किसी कविता की मुखापेक्षी।*
निरंतर देकर भी जो खाली नहीं होती, कुछ ना लेकर भी जो सदैव दाता बनी रहती है उस मां को इस एक दिवस पर क्या कहें और कितना कहें।
*यह एक दिवस उसकी महत्ता को मंडित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हो भी नहीं सकता। हमारे जीवन के एक-एक पल-अनुपल पर जिसका अधिकार है उसके लिए मात्र 365 दिन भी कम है फिर एक दिवस क्यों?*
लेकिन नहीं, यह दिवस मनाना भी जरूरी है। इसलिए कि यही इस जीवन का कठोर और कड़वा सच है कि मां इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा उपेक्षित और अकेली प्राणी है। कम से कम इस एक दिन तो उसे उतना समय दिया जाए जिसकी वह हकदार है। उसके अनगिनत उपकारों के बदले कुछ तो शब्द फूल झरे जाए. ..।
वक्त जिस गति से विकृत होता जा रहा है ऐसे में क्या इस दिन पर हर युवक अपनी मां को स्पर्श कर यह कसम खा सकता है कि नारी जाति का अपमान न वह खुद करेगा और न कहीं होते हुए देखेगा। मातृ दिवस पर बेटियों को सम्मान और सुरक्षा देने का वचन दीजिए ताकि आने वाले कल में भावी मां का अभाव ना हो सके। मातृ दिवस पर अगर मां को स्पर्श कर यह कसम खा सकते हैं तो अवश्य मनाएं यह दिन… आपको हक है मनाने का…
हमारे सनातन धर्म मे साथ ही सम्पूर्ण आर्यावर्त में मां पिताजी को गुरुजी को ईश्वर से ज्यादा पूजनीय माना गया है।
हम सबको मां पिताजी जीवन मे वो भी मानव जीवन मे एक बार मिलते हैं, सनातन धर्म मे इन्हें रोज पूजा जाता है ।इनके वगैर जीवन का आधार नहीं जीवन में कोई सौंदर्य नहीं होता है जिसने भी मां पिताजी को नहीं पूजा या उन्हें कष्ठ दिए उसका जीवन तो नर्क हो ही गया समझो।
जिनके मां पिताजी जीवित नहीं है उनसे मां पिताजी की कीमत पूछो, भारतवर्ष में मदर्स डे मनाने का कोई इतिहास नहीं है क्योंकि यंहा रोज उन्हें आदर प्रणाम किया जाता है।
*कटु सत्य,: जिस मां ने हम 3 से 5 बच्चों को अभावों में 2 कमरे के मकानों में पाला पोसा संस्कार दिए वो हम 3 से 5 बच्चे मिलकर उस मां की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं*।
यूरोप देशों में या कहें पश्चिम संभ्यता में मां पिताजी शेल्टर होम्स में रहते हैं तो वहाँ एक दिन जा कर इस तरह के दिन मनाने की प्रथा प्रचलन में है।
पूरी दुनिया में मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे सेलीब्रेट करती है, ये तो सभी जानते हैं कि ये दिन खासतौर से सभी माताओं को समर्पित है। वैसे तो माताओं के प्रति प्यार और सम्मान हर पल ही मन में होता है लेकिन इस एक दिन उसे जताकर माताओं को खास महसूस कराये जाने का चलन है।
इस दिन मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर उनके अथाह प्यार और स्नेह के लिए धन्यवाद दिया जाता है। जितना खास है यह दिन, उतनी ही रोचक है इस दिन को मनाने की शुरुआत भी। अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की अलग-अलग कहानी है।
मदर्स डे मनाने की शुरुआत –
मदर्स डे ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में एना जॉर्विस ने सभी माताओं और उनके मातृत्व को सम्मान देने के लिए आरंभ किया गया था। इसे दुनिया के हर कोने में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता हैं।
कुछ विद्वानों का दावा है कि मां के प्रति सम्मान यानी मां की पूजा का रिवाज पुराने ग्रीस से आरंभ हुआ है। कहा जाता है कि स्य्बेले ग्रीक देवताओं की मां थीं, उनके सम्मान में यह दिन मनाया जाता था।
यह दिन त्योहार की तरह मनाने की प्रथा थी। एशिया माइनर के आस-पास और साथ ही साथ रोम में भी वसंत के आस-पास इदेस ऑफ मार्च 15 मार्च से 18 मार्च तक मनाया जाता था।
मनाया जाता था मदरिंग संडे…
यूरोप और ब्रिटेन में मां के प्रति सम्मान दर्शाने की कई परंपराएं प्रचलित हैं। उसी के अंतर्गत एक खास रविवार को मातृत्व और माताओं को सम्मानित किया जाता था। जिसे मदरिंग संडे कहा जाता था। मदरिंग संडे फेस्टिवल, लितुर्गिकल कैलेंडर का हिस्सा है। यह कैथोलिक कैलेंडर में लेतारे संडे, लेंट में चौथे रविवार को वर्जिन मेरी और ‘मदर चर्च’ को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता हैं।
परंपरानुसार इस दिन प्रतीकात्मक उपहार देने तथा मां का हर काम परिवार के सदस्य द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है। अमेरिका में सर्वप्रथम मदर डे प्रोक्लॉमेशन जुलिया वॉर्ड होवे द्वारा मनाया गया था।
होवे द्वारा 1870 में रचित “मदर डे प्रोक्लामेशन” में अमेरिकन सिविल वॉर (युद्घ) में हुई मारकाट संबंधी शांतिवादी प्रतिक्रिया लिखी गई थी। यह प्रोक्लामेशन होवे का नारीवादी विश्वास था जिसके अनुसार महिलाओं या माताओं को राजनीतिक स्तर पर अपने समाज को आकार देने का संपूर्ण दायित्व मिलना चाहिए।
1912 में एना जॉर्विस ने सेकंड संडे इन मई फॉर ‘मदर्स डे’ को ट्रेडमार्क बनाया और मदर डे इंटरनेशनल एसोसिएशन का गठन किया।
गूगल से जानकारी ढूंढने जाएं तो मदर्स डे के दो प्राथमिक परिणाम सामने आते हैं, वो है,लेंट में मदरिंग संडे, ब्रिटिश कैलेंडर के चौथे संडे के रूप में और मई के दूसरे संडे के रूप में।
चीन में मातृ दिवस बेहद लोकप्रिय है और इस दिन उपहार के रूप में गुलनार के फूल सबसे अधिक बिकते हैं। 1997 में चीन में यह दिन गरीब माताओं की मदद के लिए निश्चित किया गया था। खासतौर पर उन गरीब माताओं के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों, जैसे पश्चिम चीन में रहती हैं।
बाद में यह तारीखें कुछ इस तरह बदली कि विभिन्न देशों में प्रचलित धर्मों की देवी के जन्मदिन या पुण्य दिवस को इस रूप में मनाया जाने लगा। जैसे कैथोलिक देशों में वर्जिन मैरी डे और इस्लामिक देशों में पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा के जन्मदिन की तारीखों से इस दिन को बदल लिया गया।
वैसे कुछ देश 8 मार्च वुमंस डे को ही मदर्स डे की तरह मनाते हैं। यहां तक कि कुछ देशों में अगर मदर्स डे पर अपनी मां को विधिवत सम्मानित नहीं किया जाए तो उसे अपराध की तरह देखा जाता है।
आज हम सभी मदर्स डे पर एक शपथ ले कि जिस मां ने हम 4 से 5 बच्चों को पाला है वो कोई भी मां अभावों में ना रहे उसे किसी शेल्टर हाउस की शरण ना लेना पड़े।
