नई दिल्ली। शहर में चल रहे सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ शुरू किया गया पुलिस का ऑपरेशन-720 अब धीमा पड़ता नजर आ रहा है। आठ दिन पहले बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कई सटोरियों को गिरफ्तार किया था और 17 लोगों को वांछित घोषित किया था, लेकिन अब तक केवल एक आरोपी आशीष उपाध्याय ही पुलिस की गिरफ्त में आ सका है, जबकि बाकी 16 वांटेड अब भी फरार हैं।
बड़े सट्टा गिरोह का खुलासा, कई नाम आए सामने
नवाबाद पुलिस ने 28 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए बबीना निवासी विवेक यादव को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में कई बड़े नाम सामने आए, जिनमें सत्येंद्र यादव, धर्मेंद्र साहू, हर्ष साहू, निशांत यादव उर्फ रोलेक्स, अरुण यादव, अंकित यादव, नीलेश यादव और कुलदीप दिवाकर जैसे लोग शामिल बताए गए।
इसके बाद पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई में शुभम उपाध्याय, विजय बाधवा और नितिन अग्रवाल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में एक और बड़ा नेटवर्क सामने आया, जिसमें आशीष उपाध्याय, पप्पू यादव, पंकज राय, सौरभ लिखधारी, सोनू चड्ढा, हरीश कुमार, आकाश चंचलानी, सुमित साहू और रोशन मुंशी जैसे नाम शामिल हैं।
सिर्फ एक गिरफ्तारी, बाकी 16 अब भी फरार
पुलिस ने कुल 17 लोगों को वांटेड घोषित किया था, लेकिन एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सिर्फ भाजपा नेता आशीष उपाध्याय को ही गिरफ्तार किया जा सका है। बाकी सभी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने दावा किया है कि पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द ही सभी वांछितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
स्वॉट टीम की भूमिका पर सवाल
इस पूरे अभियान में स्वॉट टीम की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बड़े सट्टा गिरोह के खिलाफ कई कार्रवाई हुई, लेकिन स्वॉट की ओर से कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई। यहां तक कि कुछ मामलों में दूसरी पुलिस टीमों ने ही कार्रवाई की।
कोर्ट में सरेंडर की तैयारी में कुछ सटोरिये
सूत्रों के अनुसार पप्पू यादव और पंकज राय जैसे कुछ सट्टेबाज कोर्ट में आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहे हैं। इसको देखते हुए पुलिस भी सतर्क हो गई है और कोर्ट परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है।
ऑनलाइन से ऑफलाइन नेटवर्क में बदल रहा सट्टा कारोबार
पुलिस की सख्ती के बाद सट्टा माफिया ने अपना तरीका बदल लिया है। पहले जहां ऑनलाइन एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा चलता था, अब वह ऑफलाइन नेटवर्क में बदल गया है।
नए सिम कार्ड और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल
8 से 10 मोबाइल फोन के जरिए संचालन
छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर सट्टा नेटवर्क चलाना
सूत्रों के मुताबिक, डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए अब हर लेनदेन और कॉल अलग-अलग नंबरों से किया जा रहा है।
पुलिस के लिए चुनौती बना नेटवर्क
लगातार बदलते तरीके और भूमिगत नेटवर्क के चलते पुलिस के लिए सट्टा माफिया पर पूरी तरह शिकंजा कसना चुनौती बना हुआ है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
