चित्रकूट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश के निर्देशन में बुधवार को प्राधिकरण सचिव इला चौधरी ने जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
बैरकों और लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान सचिव ने बैरक नंबर 13, 21, 22 और महिला बैरक का दौरा किया। यहां उन्होंने बंदियों से उनकी समस्याएं सुनीं और जेल अधीक्षक को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।इसके अलावा उन्होंने जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक का भी निरीक्षण किया, जहां सभी पंजिकाएं नियमों के अनुसार सही पाई गईं।
बंदियों को मुफ्त कानूनी सहायता की जानकारी
इला चौधरी ने लीगल एड क्लीनिक में तैनात पैरालीगल वॉलंटियर्स को निर्देश दिया कि जो बंदी निजी वकील रखने में असमर्थ हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता दिलाई जाए।साथ ही उन्होंने जेल परिसर में बने लीगल हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया, जहां बंदियों के परिजनों को निःशुल्क कानूनी परामर्श दिया जाता है।
नशा उन्मूलन पर जागरूकता शिविर
निरीक्षण के बाद जिला कारागार में तंबाकू निषेध और नशा उन्मूलन विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।इस दौरान सचिव इला चौधरी ने कहा कि तंबाकू और नशीले पदार्थों का सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह व्यक्ति के परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है।उन्होंने बताया कि युवाओं में ई-सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों की बढ़ती लत गंभीर बीमारियों जैसे फेफड़ों की समस्या, हृदय रोग और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों ने भी दी जानकारी
कार्यक्रम में लीगल एड डिफेन्स काउंसिल चीफ गया प्रसाद निषाद और डिप्टी चीफ चंद्रपाल ने भी नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति को आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर बना देता है।
सहायक योगेंद्र सिंह ने तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है और इसका उल्लंघन करने पर दंड और जुर्माने का प्रावधान है।
जेल प्रशासन रहा मौजूद
इस मौके पर जिला कारागार अधीक्षक कुश कुमार सिंह, जेलर सुनील कुमार वर्मा, उपकारापाल गुलाब सिंह यादव सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।प्राधिकरण की इस कार्रवाई से जेल में पारदर्शिता बढ़ाने, बंदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और नशा उन्मूलन को लेकर जागरूकता फैलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
