मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह और अन्य की याचिका पर की।
कोर्ट ने नगर निगम से अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है और अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में करीब 72 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और अवैध दुकानें शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इन अतिक्रमणों को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता तुरंत दी जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पुलिस बल उपलब्ध न कराए जाने के कारणों से जुड़े डीसीपी स्तर के पत्र भी अदालत में प्रस्तुत किए।
नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए 12 मई की नई तारीख तय करने की जानकारी दी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रशासन सुनिश्चित करे कि उस दिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध रहे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण से आम जनता, मरीजों और यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। पहले भी अदालत ने इस क्षेत्र में एंबुलेंस फंसने और मरीज की मौत जैसी गंभीर घटना का संज्ञान लिया था।
अब हाईकोर्ट ने प्रशासन को 15 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
