हालांकि मकानों की गणना से जुड़े आंकड़े पहले सार्वजनिक किए जाने की योजना थी लेकिन उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय के बाद इन्हें फिलहाल जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन आंकड़ों को फिलहाल गोपनीय रखा जाए। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार आने वाले समय में इन आंकड़ों को औपचारिक रूप से जारी करेगी और उसके बाद ही इन्हें सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
जनगणना के इस पहले चरण के दौरान जिले भर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और सर्वे टीमों को लगाया गया था। इन टीमों ने घर घर जाकर मकानों की स्थिति संख्या और अन्य बुनियादी जानकारी एकत्र की। चार दिन पहले ही अधिकांश क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका था। उस समय जिला जनगणना अधिकारी और एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने जानकारी दी थी कि जिले में मकानों की कुल संख्या लगभग बारह लाख बारह हजार तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा प्रयागराज जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते जिले की आवासीय संरचना को दर्शाता है।
इसके साथ ही प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या लगभग इकहत्तर लाख दस हजार के आसपास पहुंच चुकी है। हालांकि यह केवल प्रारंभिक आकलन है और वास्तविक जनसंख्या की गणना वर्ष दो हजार सत्ताईस में की जाएगी जब पूर्ण जनगणना प्रक्रिया के अंतिम आंकड़े सामने आएंगे।
प्रशासन ने अब जनगणना के अगले चरण की शुरुआत भी कर दी है। इस चरण में मकानों से आगे बढ़कर विस्तृत सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इसके लिए नई टीमों को मैदान में उतारा गया है जो घर घर जाकर लोगों की स्थिति शिक्षा रोजगार और अन्य आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगी।
जनगणना जैसे बड़े अभियान में सटीकता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे जिले में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या त्रुटि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर डेटा की जांच के बाद ही उसे आगे भेजा जाएगा।
प्रयागराज जैसे बड़े और जनसंख्या बहुल जिले में इस तरह का सर्वेक्षण प्रशासनिक दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद पहले चरण का सफलतापूर्वक पूरा होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें अगले चरण पर हैं जहां और अधिक विस्तृत आंकड़े सामने आएंगे जो भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आधार तैयार करेंगे।
