किसानों का आरोप है कि उन्हें पिछले कई दिनों से यूरिया खाद नहीं मिल रही थी, जबकि समिति के अधिकारी कथित तौर पर ऊंचे दामों पर खाद की बिक्री कर रहे थे। धान की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद न मिलने से किसानों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात को समिति के गोदाम में यूरिया का एक ट्रक पहुंचा था, जिसे उतारकर गोदाम में रख दिया गया। जैसे ही शनिवार सुबह समिति का कार्यालय खुला, बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच गए और खाद की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब किसानों को तुरंत यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसके बाद किसानों का सब्र टूट गया और वे नारेबाजी करते हुए गोदाम में घुस गए। देखते ही देखते हालात ऐसे हो गए कि किसानों ने गोदाम से यूरिया के लगभग 350 कट्टे उठा लिए। इस दौरान समिति के कर्मचारियों और सचिव के साथ धक्का-मुक्की की भी खबरें सामने आईं।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने किसानों को समझाकर शांत कराया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उपजिलाधिकारी के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है।
वहीं दूसरी ओर यह भी जानकारी सामने आई है कि समिति के सचिव और कर्मचारियों ने बाद में किसानों के घर-घर जाकर यूरिया के कट्टों की कीमत वसूली और लगभग 93 हजार रुपये की राशि जिला सहकारी बैंक में जमा कराई गई। इस पूरे मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खाद वितरण व्यवस्था और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है।
