किसानों के अनुसार इस बार केवल 40% पेड़ों पर ही फल आए हैं। पिछले साल जहां दशहरी आम 50-60 रुपए प्रति किलो तक बिकता था, वहीं इस साल इसके 100 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही आम का साइज भी सामान्य से छोटा रहने की संभावना है।
किसानों को बड़ा नुकसान, एक्सपोर्ट पर भी असर
मलिहाबाद के किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन कम होने के कारण वे विदेशों में आम निर्यात नहीं कर पाएंगे और केवल स्थानीय मंडियों में ही बिक्री करनी पड़ेगी। आमतौर पर यहां से 500 टन से अधिक आम दुबई, अमेरिका, जापान और अन्य देशों में भेजा जाता है, लेकिन इस बार निर्यात लगभग रुक गया है।
किसानों का कहना है कि बागों में कई पेड़ों पर आम नहीं आए हैं। कुछ किसानों के अनुसार यह स्थिति हर साल रोटेशन के कारण भी होती है, जबकि कई बागों में रोग और मौसम की वजह से भी नुकसान हुआ है।
‘गोल्डन मैंगो’ बनाने के लिए विशेष पैकिंग
कई बागों में आमों को विशेष लिफाफों से ढका जा रहा है, जिससे फल का रंग बेहतर आता है और बाजार में इसे ‘गोल्डन मैंगो’ के नाम से बेचा जाता है। हालांकि इससे लागत भी बढ़ गई है।
वैज्ञानिकों ने बताई मौसम की वजह
सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बौर आने के समय कोहरा और उसके बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया। फूलों में नमी बैठने और सड़न की वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
कुछ क्षेत्रों में बेहतर फसल
हालांकि मलिहाबाद में नुकसान के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे मेरठ और अमरोहा में चौसा और लंगड़ा आम की अच्छी पैदावार दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर इस साल दशहरी आम की कम आपूर्ति के कारण बाजार में दाम बढ़ना तय माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगा आम खरीदना पड़ सकता है और किसानों को मिश्रित नुकसान-लाभ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
