इस सम्मान समारोह के दौरान नैना को ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III और क्वीन कैमिला से मिलने का भी अवसर मिला। यह उपलब्धि उनके जीवन की कठिन यात्रा और सामाजिक बदलाव के लिए किए गए कार्यों का परिणाम मानी जा रही है।
नैना का बचपन संघर्षों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेतों में काम करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का प्रयास किया और गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा का खर्च निकाला।
बाद में आगा खान फाउंडेशन और द किंग्स ट्रस्ट इंटरनेशनल की संयुक्त पहल ‘प्रोजेक्ट लहर’ ने उनकी मदद की, जिसके जरिए वे दोबारा स्कूल लौटीं, स्कॉलरशिप हासिल की और अपनी पढ़ाई पूरी की।
वर्तमान में नैना किशोर लड़कियों के लिए लाइफ स्किल्स कोच के रूप में काम कर रही हैं। वह बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए लगातार जागरूकता फैला रही हैं। उनके प्रयासों से सैकड़ों लड़कियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
पुरस्कार मिलने के बाद नैना ने कहा कि उनके जीवन के संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। उन्होंने यह सम्मान सभी युवतियों को समर्पित करते हुए कहा कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने जीवन की सफलता की कहानी खुद लिखनी चाहिए।
नैना की यह उपलब्धि न केवल बहराइच बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है, जो यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
